Friday, 11 November 2016

अजनबी... जाना –पहचाना सा - I


                हम भूल गये रे हर बात मगर तेरा प्यार नही भूले,
                क्या क्या हुआ दिल के साथ -२ मगर तेरा प्यार नही भूले
                हम भूल गये रे हर बात मगर तेरा प्यार नही भूले


लता मंगेशकर की ये लाइन्स कानो में जाते ही एक अलग ही दुनिया के रंग और आरजू मन में उभर आते हैं.
ये एहसास कुछ अलग है..क्या है ? मालूम नहीं लेकिन कुछ अलग है शायद सबसे अलग. हो सकता है अलग-अलग लोगो के लिए ये अलग-अलग मायने रखते हों लेकिन अपने लिए तो बस .. जो भी है बस यही है कुछ 
अलग सा- कुछ नया- सा ....
आज भी जब अपनी खिड़की के पास कुर्सी डाल कर चाय की प्याली के साथ प्याज के गरमा-गरम पकोड़े हाथ में लिए हुए जब बैठी और मधिम आवाज़ में बजती हुई लता जी का ये गाना कानो में पड़ा तो ... बस मानों कानो में संगीत का एक मीठा रस भर गया .. धड़कने कहीं मशगुल हो गयीं और नज़रें ... बस कहीं जा टिकीं. हाथों कि उँगलियाँ भी प्याज के पकोड़े को मुँह के सुपुर्द कर के अनायास ही बालों में कहीं सुलझी- उलझी लटों को सुलझाने में मसरूफ हों गयी ..
         जेहन में अगर कोई ख्याल रहा तो बस इतना ...

           ”हम भूल गये रे हर बात मगर तेरा प्यार नही भूले ...”

यादों के झरोखे से कुछ यादें हमारे मन पटल पर किलोले करनी लगी..होठों पर एक दबी-दबी सी मुस्कान और आँखों में 
 अलग – सी चमक आ गयी. बरबस ही याद आ गया अपना “लव-ट्री”, वही जो बी.ऊ.आई.इ (BUIE) के हॉस्टल कैंपस कि शान हुआ करता है. और हम जैसों का टाइम पास, ना-ना उसकी तरफ नज़रे कर के बैठना ही अपना टाइम पास कर देता था.
और याद आये भी क्यों नहीं.. आखिर वो अपना “ लव ट्री “ जो ठहरा.. हर वक़्त कपल्स (couples) की अठखेलियों से घिरा हुआ, लवर्स का फेवरेट अड्डा..जाने कितने दिल जुड़े उस पेड़ के नीचे और न जाने कितनी मोहब्बतें जवान हुईं. उन्ही में से कुछ यादें अचानक ही याद आ गयी ये गाना सुनते ही और अकेली होते हुए भी मन जोर के ठहाकों के साथ हँस पड़ा. और लबों ने ये लाइन्स दोहरा दीं ..
            ”हम भूल गये रे हर बात मगर तेरा प्यार नही भूले ...”


सोचा ये यादें आप सबके साथ भी शेयर करूँ ... शायद आप में से भी कुछ लोग अपनी बीती कहानियों को याद कर लें ..
                                                                To be Continue …

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