ये शाम दीवानी भी ढल
जाएगी
तुम राह-ए-उल्फत में दिल
को लगाकर तो देखो..
मिजाज़-ए-मौसम भी बदल
जायेगा
कभी आशिक़ी में उतरकर जो
देखो..
ये शाम दीवानी भी ढल
जाएगी
तुम राह-ए-उल्फत पर चलकर
तो देखो..
जो रंग है बिखरे इन
फिजाओं के
कभी तुम भी उनसे दिल लगा
कर तो देखो...
कि बदल जायेगा हाल-ए-दिल
तेरा भी
कभी आशिकी में उतरकर तो
देखो..
भूल जाओगे तुम भी यक़ीनन
अपने हर दर्द को,
कभी किसी से मुहब्बत कर
के तो देखो..
हरेक लम्हा, हरेक पल भी
दिल में उतर जायेगा
किसी को दिल में बिठा कर
तो देखो..
ये शाम दीवानी भी ढल
जाएगी
तुम राह-ए-उल्फत में दिल
को लगाकर तो देखो..
मिजाज़-ए-मौसम भी बदल
जायेगा
एक बार दरिया-ए-इश्क में उतर
कर तो देखो..
Arpana Sharma


No comments:
Post a Comment