जब हवाओं में हो प्रीत,
हो
शब्दों में संगीत,
तभी तो कविता होगी .
जब नभ में बादल
छायें,
मौसम हो सावन का,
बरसे फुहार, हो इंतज़ार मन
भावन का,
जब प्रेम की होगी जीत,
तभी
तो कविता होगी ...
जब देश प्रेम की भावना
शब्द जागाते हों,
जब हृदय में मानव प्रेम
के दीप जलाते हों,
जब शत्रु हो भयभीत,
तभी
तो कविता होगी..
हो शब्दों में संगीत,
तभी
तो कविता होगी ...
जब सब को भोजन मिले,
न
कोई भूखा सोये
अम्बर के नीचे सब के सिर
पर छत भी होए
मानवता गाये गीत,
तभी तो
कविता होगी ...
हो शब्दों में संगीत ....
जब गद्य पद्य में अंतर न
दिखाई दे ,
कविता के नाम पर चुटकुला
हमे सुनाई दे,
जब रचना हो रसहीन,
तो फिर
क्या कविता होगी !
हो शब्दों में संगीत,
तभी
तो कविता होगी ....
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