It’s a festive seson but for the people like
me , who are away from their family thie festival is
Just like another days. Trying to get
involved myself in some poetry… found this piece of
Poem..
कदम-कदम
पे चट्टानें खड़ी रहें , लेकिन
जो चल
निकलते हैं दरिया तो फिर नही रुकते.
हवाएं
कितनी भी टकराएँ आंधियां बनकर,
मगर
घटाओं के परचम कभी नही झुकते.
हर एक
तलाश के रस्ते में मुश्किलें हैं,मगर
हर एक
तलाश मुरादों के रंग लाती है.
हजारों
चाँद सितारों का खून होता है
तब एक
सुबह फिजाओं पे मुस्कुराती है.
जो अपने
खून को पानी बना नही सकते
वो
ज़िन्दगी में न्य रंग ला नही सकते.
जो
रस्ते के अंधेरों से हार जाते हैं
वो मंजिलों के उजालों को पा नही
सकते.
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